शरीर मिट्टी में मिल जायेगा

 

एक दिन शरीर को मिट्टी में ही मिल जाना है, तो फिर क्यों ना उसको किसी के जीने की वजह बनाया जाए। देश भर में अंगदान के बारे में लोग जागरूक नहीं है और जो लोग जागरूक है वह मृत्यु के बाद अंग दान करने से कतराते है। इन सब से कही न कही लोग पुरानी धार्मिक बातो पर विश्वास रखते है।

अंगदान की शुरुआत

 

अंगदान और प्रत्यारोपण ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994’ के अंतर्गत आता है, जो फरवरी 1995 से लागू हुआ। साल 2011 में इस अधिनियम में संशोधन कर ऊतक दान को भी इसके अंतर्गत लाने का प्रावधान किया।

एक दान आठ की जान

 

अगर एक व्यक्ति अंगदान कर दे तो वह आठ या उस से ज़्यादा लोगों की ज़िन्दगी को बचा सकता है। किडनी, फेफड़े, लिवर, हार्ट, इन्टेस्टाइन, पैंक्रियाज, आँख, त्वचा को दान कर सकता है।

 

शिप ऑफ थीसिस मूवी मैं इस बात को बखूबी समझाया गया है कि कैसे एक अकेला इंसान आठ लोगों की ज़िन्दगी को बचाता है। किसी को आँख दे कर, किसी को लीवर दे कर ऐसे कई अलग-अलग लोगों को ज़िन्दगी दी। उनमें से कोई नहीं जानता कि उनको ये अंग दान कहा से मिला लेकिन जब सब एक एनजीओ की वजह से एक साथ मिलते है और पता चलता है कि उन सब की जान बचने वाला एक ही इंसान है।

अंगदान कौन कर सकता है?

 

अंगदान हर इंसान कर सकता है किसी भी रूप में वह दूसरे के उपयोग आ सकता है।

 

अगर मरने के बाद भी हमारा शरीर किसी की जीने की वजह बन सकता है तो उस से बड़ी मुक्ति हमें क्या मिल सकती है?

 

भारत में केवल 0.01% लोग मरने के बाद अंग दान करते है और स्पेन में 35.3% लोग अंग दान करते है जो दुनिया में सबसे अधिक है।

 

भारत में भी कुछ ऐसे राज्य है जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, चंडीगढ़ पुडुचेरी, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश ने काफ़ी अच्छी मात्रा में अंगदान किया है, लेकिन भारत की आबादी के मुताबिक ये काफी नहीं है।

 

हर रोज़ भारत में 17 लोग अंग प्रत्यारोप ना होने के कारण मरते है।

 

तो फिर हम अंग दान क्यों नहीं करते?

 

यहा भी ऐसे लोगों है जिन्होंने इस खूबसूरत दुनिया को नहीं देखा हमारी रोशनी उनको दुनिया देखने का मौका दे सकती है।

 

हमारा दिल उनके जीवन को धड़कने की वजह दे सकता है।

 

हमारा लीवर उनको फिर से जीने की उम्मीद दे सकता है।

 

भारत में लोग अंग दान क्यों नहीं करते? जागरूकता की कमी? या फिर अंधविश्वास?

 

इसमें से ही कुछ है जो हमको अंगदान करने से रोकता है।

 

हम सबको भी भारत को रोग मुक्त करना है अंग दान करके।

 

आइये हम सब मिल कर अंगदान दिवस के दिन पर ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को अंगदान के लिए जागरूक करे “अंगदान से जीवनदान करे”।