अंत:करण क्या है ?

हमारे भीतर एक आवाज़ है जो हमेशा हमसे कुछ कहती है |यह आवाज़ हमारे अंत:करण की है |हमारा अंत:करण अथार्थ हमारा अंतर्मन, वो शक्ति है जो हमें सही और गलत में अंतर करने का विवेक प्रदान करती है |यह चेतना हमारे शरीर और आत्मा को जोड़ने वाले सेतु का काम करती है |

यह भीतरी आवाज़ प्रत्येक मनुष्य में होती है |फिर चाहे वो एक छोटा बच्चा हो , एक चोर, हो या एक संत | यह आंतरिक चेतना हमारा सदा ही अच्छाई और सच्चाई की ओर मार्गदर्शन करती है | जब भी हम कोई गलत काम करने के बारे में सोचते हैं , हमारे मन की यह आवाज़ हमें वो गलत काम करने से रोकती है |परन्तु इस आवाज़ को सुनना या सुनकर कर भी अनसुना कर देना हमारे हाथ में ही होता है | जो व्यक्ति अपने अंतर्मन की आवाज़ को हर बार -लगातार अनसुना करता रहता है ,उस व्यक्ति की यह आंतरिक आवाज़ भी  समय के साथ धीमी हो जाती है |

अंत:करण के तत्त्व 

हमारा अंत:करण चार तत्वों का समावेश है |मानस, चित्त ,बुद्धि, और अहंकार |

मानस यानी मन,वो प्रक्रिया है जिसके कारण मनुष्यों में भावनाएं एवं इच्छाएं उत्पन्न होती है |हम ने हमेशा से लोगों को कहते हुए सुना है कि ,’मेरा बाहर जाने का मन हो रहा है’ या ‘आज कुछ मीठा खाने मन है ‘|इन बातों से हम ये समझ सकते है मन हमारे भावों और इच्छाओं को नियंत्रित करता है |

चित्त यानि  हमारे अवचेतन मन की स्मरण शक्ति |यह हमारे सूक्ष्म शरीर का वो स्तर है जहाँ बहुत सी बातों , चित्रों एवं अनुभवों का एकत्रण होता है | ये वही अनुभव है जिनसे हमें कुछ बड़ी सीख मिली हो या जिनका हमारे मानसिक पटल पर एक गहरा असर पड़ा हो |

बुद्धि यानि  हमारी सोचने-समझने की शक्ति | हमारी बुद्धि के कारण ही हम तर्क –वितर्क कर पाते है |हमारी सोचने समझने की इस क्षमता के बल पर ही हम जिंदगी के छोटे से बड़े सभी अहम फैसले ले पाते है|

अहंकार अथार्त  ‘मैं’ की वो भावना जिससे हम खुद ही को सर्वोपरि समझने लगते है|हम हर प्रश्न खुद से संबंधित ही करते है | जब हम जीवन में सिर्फ़ खुद ही के बारे में सोचते है तब हम कभी कुछ बड़ा हासिल नहीं कर पाते |

इन तत्वों को समझ कर हम अपने कर्मों पर नियंत्रण कर सकते है | साथ ही ,इन सभी तत्वों के माध्यम से हम अपने सूक्ष्म शरीर को बेहतर रूप से जान पाएँगे |सूक्ष्म शरीर ही हमारे आत्मा का निवास है | हमारा अंत:करण हमारी आत्मा की ही वाणी बोलता है और हमारे शरीर और आत्मा के बीच संवाद स्थापित करता है , जिसके द्वारा  हम अपने कर्मों को एक  सही दिशा दे पाते हैं |

अंतर्मन को सुनने के लाभ

बुरी आदतों से आज़ादी  – हम सभी अपनी किसी न किसी बुरी आदत से छुटकारा पाना चाहते हैं |ऐसे में यह आपका अंतर्मन ही है जो उस बुरी आदत को छुड़ाने में आपकी पूर्ण रूप से सहायता कर सकता है |तो अगली बार आप सिगरेट पीना चाहे , या ज्यादा देर तक सोना चाहते हो तो एक क्षण के लिए उस आवाज़ को सुने जरूर , जो आप से कह रही होगी, यह इच्छा गलत है |

आत्मग्लानि से मुक्ति –जब हम स्वयं के अंतर्मन की आवाज़ को सुनेंगे तो हम हर प्रकार के कुकर्म से दूर रहेंगे|  जैसे ही हम किसी बुरे काम को करने की सोचेंगे, हमारी भीतरी आवाज हमें तुरंत ही वो काम न करने का सन्देश भेजेगी और अगर हम अपने अंत:करण की इस आवाज को सुनकर उसे मानेंगे ,तो हम वो बुरा कार्य करेंगे ही नहीं |

जिसके चलते हमें वो बुरे कर्म को करने का न कोई पतावा होगा न ही कोई ग्लानि |

आंतरिक ख़ुशी का अनुभव –जब हमे किसी गलत काम को करने का कोई  पछतावा होगा तो हम ग्लानि के बोझ से भी आज़ाद होंगे |जिसके चलते हमें बहुत ख़ुशी मिलेगी और फिर हम अच्छे काम करने के लिए प्रेरित और उत्साहित होंगे |

मजबूत रिश्ते – जब हम अन्दर से खुश होंगे और नैतिकता की राह पर चलकर जीवन के सुखों की अनुभूती करेंगे तो ये ख़ुशी हमारे जीवन के प्रत्येक रूप में झलकेगी |लोगों से हमारे रिश्ते अच्छाई के आधार पर मजबूत होंगे |हमें सही लोगों से रिश्ते बनाने में भी ये आवाज़ हमारी मदद करेगी |

आध्यात्मिक ज्ञान – हमारे अंतर्मन की आवाज को सुनना यानि ईश्वर को सुनना |अंतर्मन ,आत्मा की आवाज है |और आत्मा परमात्मा का ही एक अंग है |अच्छे कर्मो का साथ हमें न सिर्फ आत्मिक ज्ञान का अनुभव कराता है बल्कि उस अलौकिक शक्ति को समझने में भी हमारी मदद करता है |

उर्पयुक्त कही गयी सभी बातों से ये स्पष्ट होता है की अपने अंत:करण को समझने और सुनने से हमें एक नयी और बेहतर जीवनशैली का अनुभव होगा |