२३ अक्टूबर २०२१ को भारतीय विचार मंच, अहमदाबाद द्वारा “भारत मे जनसंख्या नियंत्रण कानून  की आवश्यकता” पर एक कार्यकम आयोजित किया गया | कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राज्यसभा से सांसद ,लेखक व विचारक डॉ. राकेश सिन्हा रहे | 

 

आयोजन का प्रारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत  के वीडियो भाषण के साथ हुआ जिसमे उन्होंने देश की जनसँख्या निति का पुनर्निर्धारण कर उसे सब पर समान रूप से लागु करने का प्रस्ताव दिया | तथा घुसपैठ को रोकने और राष्ट्रीय नागरिक पत्रिका का निर्माण करने का के साथ ही जन जागरण द्वारा असंतुलित जनसँख्या को नियंत्रण में लानी की बात कही |  

 

श्री मोहन भागवत के भाषण के बाद डॉ. शिरीष काशीकर ने डॉ. राकेश सिन्हा को स्मृति चिन्ह दे कर उनका स्वागत किया और इसके बाद डॉ. सिन्हा ने वक्तव्य प्रारम्भ किया | जिसमे उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून से सम्बंधित अपने  प्राइवेट मेम्बर बिल को संसद में पेश करनी की बात कही और सपष्ट रूप से कहा की विपक्ष के हंगामे के कारण उस बिल पर चर्चा नहीं हो पायी |  

 

डॉ. राकेश ने बताया इस बिल को लाने की कोशिश 1940 से की जा रही है। और परिवार नियोजन से जनसँख्या नियंत्रण की शुरूआत जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल प्लानिंग कमिटी के द्वारा की थी। उन्होंने आगे कहा की 1974 से लेकर 2014 तक सभी सरकारों ने अभी तक दो लाख करोड़ रुपए जनसंख्या नियंत्रण के लिए लगाए पर फिर भी उसका कोई साफ परिणाम नही देखा गया।

 

आगे बढ़ते हुए डॉ. राकेश सिन्हा ने कहा की “ वह यह नहीं मानते की प्रयास नहीं हुआ लेकिन  प्रयास की नियत, प्रयास की दिशा , प्रयास में  गंभीरता और प्रयास मैं तर्क की कमी रही है ” | 

 

डॉ. सिन्हा ने सर हर्बर्ट होप रिसले की रिपोर्ट के बारे मैं बताया जिसमे उन्होने कहा था की १९०१ की जनगणना के बाद ऐसा लगता है ,की  मुस्लिम और ईसाई समाज  में पुनर्जागरण आ रहा है और वह बढ़ रहें हैं और इससे यह सवाल उठता है की क्या हिन्दू समाज अपने इस गढ़ को बचा पाएगा या नहीं | और यह बात तथ्यात्मक है ऐसा कहा | 

 

उन्होंने 1929 की पुस्तक “हिन्दू : ए  डाईंग रेस”, सैफरन डेमोग्राफिक और काउंटिंग गेन एंड कॅल्क्युलेटिंग लॉसेस जैसी बातें  की सैफरन डेमोग्राफी असल मैं सभ्य डेमोग्राफी है | और  संसाधनों और जनसँख्या मैं संतुलन की बात कही | 

 

राकेश जी ने बायोकैपसिटी यानी जन संसाधन को पुनः इस्तेमाल करने की बात को बढ़ावा देते हुए बताया की, “व्यक्ति अपनी आवश्यकता के आधार पर नहीं वरन अपनी इच्छा से संसाधन इस्तेमाल करता है जिसके कारण सभी को समान रूप से  संसाधन नही मिल पाते इसलिए देखा जाए तो जनसंख्या नियंत्रण कानून जरूरी है।” उन्होंने बताया की भारत मैं इकोलॉजिकल फुटप्रिंट और बायो कैपेसिटी मैं 177 % का अंतर है 

 

इस मंच के द्वारा इन्होंने TFR यानी टोटल फर्टिलिटी रेट जो की पश्चिमी समाज की देन है उसे खारिज करते हुए इसे फ्रॉड बताया और  यह कहा की  भारत मे TMFR यानी टोटल मैरिटल फर्टीलेट रेट लागु चाहिए जो यह बताता है की भारत की स्त्री विवाह के पश्चात कितने बच्ची को जन्म देती है |   डॉ. सिन्हा ने दोनों रेट्स के आंकड़े देते हुए साबित किया की टोटल मैरिटल फर्टीलेट रेट TMFR के हिसाब से भारत की जनसंख्या नियंत्रित से बहुत दूर है।

 

डॉ. सिन्हा ने अपने बिल की बात करते हुए बताया की वह सभी  को सामान रूप से मौका देगा और अठारह महीने तक किसी पे  कार्यवाही नहीं की जाएगी और इस बिल को सनराइज सनसेट कानून बताया क्यूंकि यह कानून ११ साल बाद पुनर्विचार में  जाएगा और आवश्यकता न होने पर निरस्त कर दिया जाएगा | 

 

अपनी वाणी को विराम देते हुए डॉ. सिन्हा ने कहा की कानून से ज्यादा जनसंख्या नियंत्रण को एक  आंदोलन बनाने की बात कही और इसे  सांप्रदायिक चश्मे से न देखने की बात कही क्युकी यह भावी पीढ़ी के लिए जरुरी है | 

 

अपने वक्तव्य के समापन के बाद डॉ. राकेश सिन्हा ने श्रोता दीर्धा मैं बैठे लोगों के सवालों के जवाब बड़ी बेबाकी और विस्तार से दिए | 

 

इस कार्यक्रम  भारतीय विचार मंच के प्रांत मंत्री श्री ईशान जोशी एवं  अहमदाबाद के शहर अध्यक्ष डॉ. शिरीष काशीकर एवं कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे |  डॉ. सिन्हा के वक्तव्य उपरांत श्री ईशान जोशी जी ने कार्यक्रम की आभार विधि करते हुए श्री राकेश सिन्हा और सभी श्रोताओं का धन्यवाद् दिया |