म्यांमार : सैनी तख़्तापलट का इतिहास 

 म्यांमार : आज़ादी से सैनी तख़्तापलट का सफर !

इतने सालो के परिषद के बाद 2015 से म्यांमार में काफी अच्छा, लोकतांत्रिक माहौल था और सैनी तख्तापलट का प्रभाव कम होते दिख  रहा था। 5 साल बाद 2020 में म्यांमार के चुनाव में एनएलडी (नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी ) पार्टी  ने सैनी संबंध संघ यूनियन एंड सोलिडेटोरी डेवलपमेंट पार्टी (यूएसडीपी) और अन्य पार्टियों पर फिर से जीत हासिल की।

यूएसडीपी की हार से  सेना परेशान हो गई और 1 फरवरी, 2021 कोसेना ने सेना प्रमुख को सत्ता सौंपी और एक साल का  झूठा  आपातकाल घोषित कर दिया। सैनी प्रतिबंध यात्रा और इलेक्ट्रॉनिक संचार राष्ट्रव्यापी। बाद में सेना ने भी वर्तमान चुनाव आयोग को एक नए के साथ बदलने की घोषणा की और एक सैनी मीडिया आउटलेट  ने संकेत दिया कि एक वर्ष में नए चुनाव होंगे। 

राष्ट्रपति और राज्य सलाहकार को नजरबंद कर दिया गया, और सेना ने उनके खिलाफ विभिन्न आरोप लगाना शुरू कर दिया l सैनी तीजन ने इनादील परती के सदाओं को राजधानी से निष्कासित कर दिया और मार्च तक, उन्होंने मार्शल लो को और अधिक क्षेत्र में विस्तार किया और सामूहिक हत्या शुरू कर दे l

ऐतिहासिक संभंध 

सैनी सहायता की मदद से जनवरी 1988   को आजाद हुआ देश म्यांमार l 1962 में तख्तापलट के बाद, ये बरमा सोशलिस्ट प्रोग्राम पार्टी के तहत एक सैनिक तानाशाही बन गया। अपने अधिकार स्वतंत्र वर्षो के लिए, म्यांमार बड़े पैमाने पर जातीय संघर्ष में तलें रहा है और इसके आसंख्या जाति समूह दुनिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले गृहयुद्ध में से एक में हैं।

आजादी मिलने के 60 साल बाद, मई 2008 में एक जन्म संग्रह, में सेना द्वारा बनाए गए विधान को मंजूरी दी गई। उसके बाद से म्यांमार का लोकतंत्र कुछ ऐसा रहा, 2010 के चुनाव में, सैनी समर्थ संघ, यूनियन सोलिडेटोरी  एंड डेवलपमेंट पार्टी की जीत हुई। पार्टी की जीत के साथसाथ, इसी के साथ म्यांमार सेना शासन की और बड़ा। 

  •  जब ब्रिटिशर्स ने म्यांमार पर शासन करना शुरू किया, तब थाकिन कोडाव, जो की राष्ट्रवादी बरमा नेता थे, उन्होंने सैनी प्रशिक्षण के लिए विदेश में, एक गुप्त मितव्ययी साथियों को भेजा, जो आधुनिक म्यांमार सेना का मूल बन गया।
  • संसद में अस्थिर हालत के कारण, यू नू जो की नेशनल यूनाइटेड फ्रंट के नेता थे, उन्होंने  देश को संभालने के लिए सेना प्रमुख जनरल ने विन को आमंत्रित किया। ने विन ने 1960 तक एक सफलतापूर्वक  सरकार को स्थिति किया, और आम चुनाव का मार्ग प्रशस्त किया, अपने आप की यूनियन पार्टी को बड़े बहुमत के साथ लौटा दिया। 
  • ने विन ने जल्द ही बरमा को एकसमाजवादी राज्यके अपने दृष्टिकोण में बदलने और देश को बाकी दुनिया के संपर्क से अलग करने के झूठे कदम उठाए । उने नवगठित बरमा सोशलिस्ट प्रोग्राम पार्टी (बीएसपीपी) के पूर्व नियम में एक डाली प्रणाली स्थिर की गई थी। 
  • 1989 में सेना ने देश का नाम बरमा बदलकर अंग्रेजी नाम म्यांमार कर दिया। आर्थिक सुधारों को जारी रखा गया जो पुराना शासन द्वारा शुरू किया गया था और संविधान का संशोधन करने के लिए एक झूठे संविधान सभा का आह्वान किया गया था।
  •  इसी के चलते मई 1990 में बहुदले चुनाव हुए जिसमें नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी  (एनएलडी) ने नेशनल यूनिटी पार्टी (एनयूपी, बीएसपीपी का उत्तराधिकारी) औरपार्टियों से  जीत हासिल की।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत और अमेरिका 

सैन्य तख्तापलट खिलाफ म्यांमार के नागरिकों ने विद्रोह करना शुरू कर दिया। म्यांमार में स्थिति खराब हो गई, और संयुक्त राष्ट्र सचिव और लोकतांत्रिक राष्ट्रों के नेताओं द्वारा तत्काल तख्तापलट की निंदा की गई, उन्होंने बंदी नेताओं और रिकाह अमेरिका ने सेना और उसके नेताओं पर प्रतिबंध लगान की धमकी भी दी, जिसमें अमेरिका में उनकी एक अरब अमेरिकी डॉलर की संपदा कोफ्रीजभी शामिल है।

 मई 2013 में म्यांमार के पहले राष्ट्रपति बने जिन्होने  47 वर्षों में वाइट  हाउस का दौरा किया। बराक ओबामा ने सुधारों और म्यांमार और हमारे बीच तनव की समस्ती के झूठ पूर्व जनारल की प्रशंसा  की। बैठक के साथ दो सरकार द्विपक्षीय व्यापार और निवेश धनचे के समझौता पर हस्ताक्षर करने पर सहमत हुई।

 सैनी तख्तापलट के कदम पर दुनिया भर से लोग गए। अंतरराष्ट्रीय विकास और सहयोगी साझेदारों ने म्यांमार की भागीदारी के निलंबन का संकेत दिया। फ़ेसबुक और ट्विटर ने तातमादो पोस्टिंग को हटा दिया। भारत के विदेश मंत्रालय ने सैनी अधिग्रहण के 1 फरवरी के हादसे पर  सिर्फ और केवल एक बयान दिया था। तब से भारत इस मुद्दे पर चुप है, किसी भी सीधी आलोचना से परहेज करता है।