फितरत

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बातें मारामारी की

और इज्ज़त नहीं नारी की,

बैठ के बस तुलना कर ले तू

स्कर्ट, जीन्स और साड़ी की |

 

नीच है तू, पापी है,

चोर है तू, बेईमान है |

धर्म के नाम पे रोता है,

चैन से कैसे सोता है |

 

मैला मन,  स्वार्थी सीरत,

 

धोने पाप चला तू तीरथ |

नासमझ समझदार कही का,

मौसम जैसे बदले फितरत |

 

उठ जरा….! देख चारो और 

 

अंधियारा छाया है घोर,

हर नुक्कड़ बैठ हैं सरपट

तेरे – मेरे जैसे चोर |

सुधर जा, अभी वक़्त है,

कानून जीवन का सख्त है |

कही धुप, कही छाँव,

कही फुल तो कही रक्त है |

 

 

कठिन है जीवन मन है,

मोक्ष सभी को पाना है,

इस निति से क्या पायेगा

फिर ऊपर भी तो जाना है |

 

क्यों……????

 

 

 

 

 

 

By Akshay Chaudhary

[email protected]

 

 

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