प्रारंभिक रिलीज: 26 जुलाई 2021- Netflix

निर्देशक: लक्ष्मण उतेकर

संगीत निर्देशक: ए आर रहमान

निर्माता: दिनेश विजन

प्रोडक्शन कंपनियां: मैडॉक फिल्म्स, जियो स्टूडियोज

 

मिमी समृद्धि पोरे की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मराठी फिल्म ‘माला आई व्हायची’ की रीमेक है, जो 2011 में रिलीज हुई थी। सरोगेसी पर आधारित फिल्म मिमी निश्चित रूप से हमारे समाज में वर्जित विषय के बारे में बात करने के लिए थोड़ी देर हो चुकी है। लेकिन देर आये, दुरुस्त आये। 

 

‘मिमी’ फ़िल्म  की कहानी 25 साल की एक चुलबुली लड़की मिमी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बॉलीवुड अभिनेत्री बनना चाहती है। लेकिन भगवान की अन्य योजनाएँ थीं और वह जाने अनजाने एक माँ बन जाती है।

 

मिमी सिर्फ एक आयामी सरोगेसी कहानी होने के अलावा और भी बहुत कुछ है। यह आकांक्षाओं, सपनों, उन्हें उखड़ते हुए देखने और खुद को फिर से खड़ा करने के बारे में है।

 

शेखावती (राजस्थान का एक शहर) में स्थित, एक अमेरिकी जोड़ा (जॉन और समर) एक सरोगेट की तलाश करते हैं। भानु (पंकज त्रिपाठी) उन्हें इसके बारे में बोलते हुए सुनता है और अतिरिक्त पैसे कमाने के प्रयास में सरोगेसी के पीछे के अर्थ को समझे बिना उनकी मदद करने का फैसला करता है।

 

मिमी – एक संपन्न परिवार से ताल्लुक नहीं रखती है और इसलिए उसे बॉलीवुड में सुपरस्टार बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए पैसे की जरूरत है। फिर भानु, जो एक ड्राइवर है, मिमी के पास आता है और उसे एक अमेरिकी जोड़े की सरोगेट माँ बनने के लिए कहता है जो एक स्वस्थ युवा लड़की की तलाश कर रहे है जो उनके बच्चे की सरोगेट माँ हो सकती है। वह मान जाती है क्योंकि वे उससे बढ़ी रक़म देने का वादा करते हैं।  

 

पहले 45 मिनट के लिए, हम जानते हैं कि मिमी केवल पैसे के लिए सरोगेट बन जाती है। मेरे लिए मिमी हम में से कई लोगों की तरह एक युवा लड़की है जो सपने देखने से नहीं डरती। जब चीजें बदलती हैं, तो वह इसके साथ ढलने के लिए अपना समय लेती है। लेकिन जब मिमी गर्भवती होती है, तो वो अमेरिकी जोड़ा बच्चे को मिमी की कोख में छोड़ कर चले जाते हैं क्योंकि उन्हें बताया जाता है कि उनके अजन्मे बच्चे को डाउन सिंड्रोम है। लेकिन मिमी फैसला लेती है की वो इस बच्चे को जन्म देगी। 

 

यहीं से कहानी में बदलाव आता है और मिमी एक स्वस्थ और तंदुरुस्त बच्चे को जन्म देती है और भानु और उसकी पत्नी सहित उसका पूरा परिवार उसे अपने परिवार की तरह प्यार करने लगता है।

 

इन सबके बीच, कई हास्यपूर्ण और भावनात्मक दृश्य हैं जो दर्शकों को स्क्रीन से जोड़े रखेंगे। पंकज त्रिपाठी की कॉमिक टाइमिंग को अतिरिक्त स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है और अभिनेता मनोज पाहवा और सुप्रिया पाठक ने मिमी के माता-पिता के रूप में बहुत अच्छी भूमिका निभाई हैं। मिमी की सबसे अच्छी दोस्त शमा की भूमिका निभाने वाली साई तम्हंकर को भी पहचान की जरूरत है। इसमें कोई शक नहीं कि वह एक साइड रोल में सर्वश्रेष्ठ महिला अभिनेता के पुरस्कार की हकदार हैं। अमेरिकी जोड़े के रूप में एवलिन एडवर्ड्स और एडन व्हाईटॉक ने अपनी भूमिका निभाई है। फ़िल्म में कई दृश्यों में ऐसा होता हैं जब आप उनके साथ सहानुभूति रखते हैं और कई बार आप उनसे नफरत करते हैं। मिमी के रूप में कृति सेनन हर तरफ चमकती हैं। एक अभिनेता के रूप में कृति का ग्राफ इतना विकसित हो गया है। मिमी कृति के करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। 

 

फिल्म के अंत में कुछ अच्छे ट्विस्ट भी हैं जो सौभाग्य से क्लिच नहीं लगे।

 

फिल्म में ऐसे क्षण हैं जहां लक्ष्मण उतेकर ने दृश्य की गंभीरता को बदलने के लिए सहायक कलाकारों को प्राथमिकता दी है। मसलन, जब सुप्रिया पाठक अपनी बेटी से सवाल करती हैं कि तुम इस बच्चे की यशोदा और देवकी दोनों हैं, तो वो अमेरिकी इसकी माँ  कैसे हो सकती है? यह दुविधा की जड़ को दर्शाता है। कुल मिलाकर, मिमी उन मिड-बजट फिल्मों में से एक है जो दर्शकों को स्क्रीन से जोड़े रखती है। 

कहानी बताती है कि मां बनने के लिए न तो आपको जन्म देना होता है और न ही बच्चे  का अपना होना की ज़रूरत है। मां बनने के लिए सिर्फ एक चीज की जरूरत होती है, वो है “ममता”और “प्यार”।