महिलायें  हर क्षेत्र मे आगे बढ़ रही है, हर कुरीतियों से लड़ रही है।

क्रिकेट – एक ऐसा खेल है जो पूरे विश्व में व्यापक रूप से खेला जाता है। और हम एक ऐसे देश मे रहते है जहां क्रिकेट को धर्म और क्रिकेटर को भगवान माना जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह खेल मुख्य रूप से पुरुषों द्वारा खेला जाता है। लेकिन आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना हुनर दिखा रही है और आसमान छु रही है। उसी तरह वर्षों से क्रिकेट में भी महिलाओं ने अपने हाथों में गेंद और बल्ला उठा लिया है और अपने शानदार प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया है।

क्रिकेट ने हमारे दिल में कुछ इस तरह जगह बनाई है कि उसे हम अपनी जिंदगी से अलग नहीं कर सकते। भारत की हर गली में क्रिकेट खेला जाता है। क्रिकेट के बारे मे हम बहुत कुछ जानते है लेकिन महिला क्रिकेट के बारे में हम कितना जानते है? 

भारत में महिला क्रिकेट का उदय 

भारत में क्रिकेट 16वीं शताब्दी में आया। भारत में महिला क्रिकेट की शुरुआत 1973 में उस समय हुई जब भारतीय महिला क्रिकेट संघ की स्थापना हुई | भारतीय महिला टीम ने अपना पहला मैच 1976 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला। 2006 में भारतीय महिला क्रिकेट संघ को भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड में संविलियन किया गया। 

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वर्तमान स्थिति

भारत की महिला राष्ट्रीय क्रिकेट टीम, जिसे ‘वूमेन इन ब्लू ‘ भी कहा जाता है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिला क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करती है।

वर्तमान में भारतीय महिला क्रिकेट टीम आईसीसी रैंकिंग में कुल 7,662 अंक और 111 की रेटिंग के साथ चौथे स्थान पर है। यह टीम आज एशिया और दुनिया की शीर्ष टीमों में से एक है। आज महिलाओं का योगदान हर क्षेत्र में अहम हो गया है। बेलन से लेकर बल्ले तक  महिलाओं ने हर काम को बखूबी निभाया हैं। हालांकि कई महिलाएं ऐसी भी हैं जिन्हें अभी भी उनका अधिकार नहीं मिल रहा है। वे सभी अपने जीवन में जहां हैं वहां पहुंचने के लिए वास्तव में कड़ी मेहनत कर चुके हैं, उन्होंने यह मुकाम हासिल करने के लिए बहुत संघर्ष किया है। 

जैसे – भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कई खिलाडी है जिनमे पहला नाम –

 राधा यादव। राधा एक गरीब परिवार से आई वह बड़ौदा में अपने पड़ोस में लड़कों के साथ खेलती थी।  टी20 वर्ल्ड में बड़ा ब्रेक मिला और 2020 में फिर से टीम के लिए चुनी गईं।

शैफाली वर्मा- हरियाणा की रहने वाली, 16 वर्षीय शैफाली वर्मा भारत की स्टार क्रिकेटर हैं और संभवत: टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ कलाकार हैं वह वर्तमान में टी 20 में दुनिया की नंबर 1 बनने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय हैं। 

मिताली राज- अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली महिला खिलाड़ी हैं। वह एकदिवसीय मैचों में लगातार 7 अर्धशतक बनाने वाली पहली महिला क्रिकेटर हैं। वह प्रथम भारतीय और ओवरआल 5वीं महिला क्रिकेटर हैं, जिन्होंने विश्व कप में 1,000 से अधिक रन बनाए हैं। 

“म्हारी छोरियां छोरो से कम है के” हमारे देश की बेटियों ने इस वाक्य को बखूबी साबित किया है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम को पुरुष क्रिकेट टीम की तरह ही पहचान और प्रसिद्धि मिलने में अभी भी काफी समय है। 

महिला क्रिकेट टीम को और अधिक आकर्षण मिला है लेकिन उसे उस तरह की प्रशंसा और सम्मान अभी तक नहीं मिला है, जैसे कि पुरुष क्रिकेट को मिलता है। 

वक्त के साथ आधिकारिक मान्यता और वेतन समानता मिल रही है, जिसके लिए बीसीसीआई ने अपने विंग के तहत इस मुद्धे को लेने का फैसला भी किया है, और महिलाओं के खेल को उतना ही बढ़ावा दिया जा रहा है, और वे लगातार खेलना शुरू कर रही हैं जैसे उन्होंने हाल के विश्व कप में खेला था।

महिला क्रिकेट का आने वाला कल

केवल सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल, पीवी सिंधु, पीटी उषा कुछ ऐसे नाम हैं जिन्हें भारतीय खेल बिरादरी में याद किया जाता है जबकि हरमनप्रीत कौर, मिताली राज, अंजुम चोपड़ा ने अभी अपना नाम जोड़ा है, लेकिन महिलाओं के खेल को अभी भी काफी हद तक नजरअंदाज किया जाता है अभी भी विश्व कप नहीं जीतने तक लंबा रास्ता तय करना है।

क्या आने वाले समय में पुरुष क्रिकेट के भाँति महिला क्रिकेट भी अपनी मजबूत पहचान और प्रसिद्धि बना पाएगा? क्या लोग उन्हें समर्थन करेंगे जितना वे पुरुष क्रिकेट को करते है?