जो सपना दिमाग में पागल सा भागे 

जिसकी ओर कदम बढ़ना चाहे आगे 

वो कदम क्यों बढ़ते – बढ़ते ही रुक जाते हैं

क्यों? फिर एक कहानी के पन्ने वहीं थम जाते हैं

 

जहाँ जाने के लिए बेताब है 

फिर भी थामे हुए ये आग है

खुद को तुम कब तक यूँ सताओगे?

पहला कदम रखने से कब तक घबराओगे ?

 

बात बस इतनी-सी है

खयालों में तुम्हारे भी दिन-रात तुम्हारी मंज़िल ही है

यह बात जानते तुम भी हो कि, शुरुआत होती थोड़ी मुश्किल ही है

 

शुरुआत मुश्किल होती है और मंज़िल उतनी ही खूबसूरत

बस है,  तो उस पहले कदम की जरूरत

अपने जुनून की ख़ातिर तुम इतना तो करना 

वो पहला कदम जरूर रखना

क्यूंकि, जब एक दिन,

तुम्हारी कहानी के पन्ने फिर लिखें जाएंगे

और अंत में सफलता का परचम लहराएगें

तब उस कहानी की यही सीख होगी

कि हिम्मत कर वो पहला कदम रखना जरूर 

ये शुरुआत है, थोड़ी मुश्किल होगी!

 

परेशानियों से लड़कर नहीं डटकर सामना करे हाँ शुरुआत में मुश्किल होगा पर वक्त के साथ हो जाएगा।