इंटरनेट हमारी जीवनशैली का अहम हिस्सा हैं और आज दुनिया भर में तेजी से पांव पसार रहा 5G नेटवर्क भारत का भी द्वारा खटखटा रहा हैं | ऐसे में जानना जरुरी है कि क्या नेक्स्ट जनरेशन का ये नेटवर्क हमारी ज़िंदगी को आसान बनाएगा ? कौन हैं जो इस महत्वपूर्ण सहयोग की भूमिका निभाएगा? क्या वाकई विरोधियों की मिथ्या सच का आधार बन जाएगी? इससे क्या फायदा और क्या नुकसान होगा?

आइये जानते हैं |

5G प्रौद्योगिकी क्या बन पायेगी सुविधा?

आये दिन लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के चलते दुनिया आज 5G की और अपने कदम तेजी से बड़ा चुकी हैं या बढ़ाने को तैयार हैं |

अगर बात करें इंटरनेट स्पीड की तो जाहिर हैं की 5G की स्पीड 4G से काफ़ी बेहतर होंगी, इससे ना केवल कनेक्टिविटी बेहतर होगी बल्कि टेक्नोलॉजी से स्वस्थ व्यवस्था, वर्चुअल रियलिटी, क्लाउड गेमिंग हाई क्वालिटी विडियो का मज़ा बिना किसी रुकावट के हो सकेगा | और तो और तेज रफ्तार इंटरनेट से रोबोट, ड्रोन और ऑटोमैटिक वाहनों का संचालन भी आसानी से होगा|

विशेषज्ञों के मुताबिक,आने वाले दिनों में कृषि, शिक्षा,स्वास्थ्य, परिवहन, यातायात प्रबंधन, स्मार्ट सिटी के कई एप्लीकेशन की एक विस्तृत श्रृंखला क्रांति की उम्मीद जताई जा रही हैं |

डाटा रेट की बात करें तो एक रिपोर्ट के मुताबिक 5G तकनीक में इसकी 4G के मुकाबले 10 गुना ज्यादा बढ़ जाने के आसार हैं | भारतीय बाजार में 5G तकनीक पर आधारित फोन भी आ चुके हैं |

क्वालकॉम की महत्वपूर्ण भूमिका

रिलायंस इंडस्ट्रीज टेलीकॉम सेक्टर में 4G की ही तरह देश में 5G क्रांति लाने जा रही है|

रिलायंस जियो ने भारत में 5G इकोसिस्टम को ज्यादा बेहतर और सबकी पहुंच में आने वाला बनाने के लिए ‘क्रिटिकल एक्विपमेंट’ के स्थानीय निर्माण के लिए अमेरिकी चिपमेकर कंपनी क्वालकॉम टेक्नोलॉजी के साथ साझेदारी की है|

रिपोर्ट के अनुसार जियो और क्वालकॉम ने जियो प्लेटफार्म पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी रेडीसिस कॉरपोरेशन के साथ मिलकर, एक मुक्त और अंतर संचालित इंटरफेस-अनुकूलन आधारित 5G निदान का विकास किया हैं, जो वर्चुअलाइज्ड आरएएन (वीआरएएन) से लैस हैं| यह नेटवर्क सेवाओं के विकास और उसे पेश करने की प्रक्रिया को तेज कर देगा |

दिलचस्प बात तो यह भी है, कि क्वालकॉम ने भारत में टेल्को के 5G रोलआउट के लिए जियो के कट्टर प्रतिद्वंदी भारतीय एयरटेल के साथ भी हाथ मिलाया है|

जूही का व्यवधान या चिंता?

Juhi Chawla

दिल्ली हाईकोर्ट ने 5G टेक्नोलॉजी के खिलाफ लगाई गई फ़िल्म एक्ट्रेस जूही चावला की याचिका को खारिज कर दिया है।

अदालत ने जूही पर 20 लाख का जुर्माना भी लगाया है, और कहा कि यह याचिका कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है, ऐसा लगता है कि ये याचिका पब्लिसिटी के लिए दाखिल की गई है।न्यायालय ने चावला के सरकार को प्रतिवेदन दिए बिना 5G वायरलेस नेटवर्क तकनीक को चुनौती देने के लिए सीधे अदालत आने पर और मुकदमा दायर करने पर भी सवाल उठाया है।

चावला, वीरेश मलिक और टीना वचानी ने याचिका दायर कर कहा था, कि यदि दूरसंचार उद्योग की 5G सम्बंधी योजनाएं पूरी होती है, तो पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति, कोई जानवर, कोई पक्षी, कोई कीट और कोई भी पौधा इसके प्रतिकूल प्रभाव से नहीं बच सकेगा।

सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने कहा है कि 5G पूरी तरह से सुरक्षित है और आने वाले समय में गेम चेंजर साबित होगी, इतना ही नहीं इससे अर्थव्यवस्था और समाज को भी काफी लाभ होगा।

किन सब को खतरा?

 ऐसा कहाँ जा रहा है कि इंटरनेट यूजर्स की निजता को सबसे बड़ा खतरा है, टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ बर्लिन के अनुसार हैकर्स यूजर्स का डाटा ज़्यादा तेजी और आसानी से हैक कर सकता है।

वही बैंडविथ की ज़्यादा आवश्यकता होने के कारण टावरों की संख्या कई गुना ज़्यादा बढ़ानी होगी, तथा रेडियो फ्रीक्वेंसी भी तेज रफ़्तार इंटरनेट उपलब्ध कराने की राह में रोड़ा डाल सकती है।

WHO के अनुसार रेडियो फ्रीक्वेंसी बढ़ने से शरीर का तापमान बढ़ता है हालांकि स्वास्थ्य को ज़्यादा नुक़सान नहीं है।

5G के खिलाफ आज भारत समेत दुनिया भर में निजता की सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन और रेडिएशन के घातक प्रभाव को लेकर लोगों में डर पैदा हो चुका है।

सपनों का कल

भारत में तेज इंटरनेट के दीवानों का सपना अब सच होने के बहुत नज़दीक पहुँच गया है। चाहे वह ड्राइवरलेस कार की बात हो या वर्चुअल रियलिटी की इस बड़े तामझाम कि नीव कहीं ना कहीं से हमारी ज़िन्दगीयों से जुड़कर उससे प्रभावित करने वाली है। लेकिन इसका अंदाजा अभी पूरी तरह लगाना मुश्किल है कि यह कितना घातक या सुविधाजनक साबित हो सकता है।

अफवाओ को सच ना मान कर पूरी जानकारी के साथ अभी हमें दूसरे देशों के साथ क़दम मिलाकर चलना है।