Written by- Vivek Rajput

15 अगस्त 1947 के बाद से हमे एक आजाद मुल्क के रूप में विश्व में पहचाना जाने लगा। लेकिन क्या बात सिर्फ इतनी सी हैं, या इसके पीछे एक लंबा संघर्ष,त्याग,बलिदान, दृढ़ इच्छाशक्ति और अपने प्राणों की आहुति देने वालों की एक लंबी फेहरिस्त हैं।

हमे 15 अगस्त को ही आजादी क्यों दी गई इसके पीछे भी बरतानिया हुकूमत का अपना स्वार्थ था, दरअसल इसी दिन को जापान ने ब्रिटेन के आगे द्वितीय विश्व में शरणागति स्वीकार की थी, इस दिन को ब्रिटिश हुकूमत अपने वैभव के साथ जोड़कर यह दर्शाना चाहती थी कि, जिस दिन विश्व युद्ध में हमारी जीत हुई उसी दिन हमने भारत को आजादी दी, इससे उलट भारत के नेता चाहते थे की हमे आजादी 26 जनवरी को मिले, क्योंकि इसी दिन गांधीजी ने जब नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी तो कहा था की आज मैं अंग्रेज सरकार की जड़ों में नमक लगा रहा हूं इसलिए हमारे नेता चाहते थे की हमे 26 जनवरी को आजादी मिले। आजादी तो हमे दी गई पर हमारे टुकड़े करने की शर्त पर, हमारी जमीन को बाटने के शर्त पर, हमे अपनी जमी पर ही कदम रखने के लिए विदेशी नागरिक बनना पड़ा, लाखो लोगो का पलायन और बड़ी संख्या में नरसंहार,सिर्फ एक लकीर खींच जाने की वजह से अपने ही देश में विदेशी बन जाना। क्या हमने ये सब खुले मन से स्वीकार किया, मेरा मानना हैं नहीं, हमने इस बटवारे को दिल पर पत्थर रखकर स्वीकार किया परंतु आज भी उस भयानक समझौते को याद करते हुए मन में एक गुस्से का गुबार उठता हैं पर सामने बैठी मजबूरियों को देखकर मन मसोस कर रह जाना पड़ता हैं। उस समय जिन लोगो के हाथ में भारत के 35 करोड़ लोगो के भविष्य की चिंता करने की जिम्मेदारी थी उन्होंने अपने सामने रही कुछ मजबूरियों को ध्यान में रखकर जो फैसला लिया उसे मजबूरन स्वीकार करना पड़ा, और जाहिर हैं, उस फैसले से वे लोग भी सहमत नहीं रहे होंगे पर हालात ही कुछ ऐसे थे की, उनके सामने जमीन को बाटने के लिए जो लकीर खींची जा रही थी उसे चाह कर भी रोक नहीं सके। उसके बाद दुनिया के नक्शे पर एक नए मुल्क का जन्म होता हैं जो पाकिस्तान के नाम से जाना जाता है, हालाकि आजादी के इतने वर्षो बाद आज भी उस मुल्क की दशा दयनीय हैं, और दिशाहीन तरीके से चल रहा है और पूरी दुनिया में वह आतंकियों के लिए सबसे प्रिय पनाहगार देश बना गया है और एक “फेल्ड स्टेट” का तमगा हासिल करने के लिए आतुर है और लगता है उसकी यह आतुरता उसे अपने मनसूबों में कामयाब जरूर बनाएगी, धर्म के नाम पर वहा लोगो को बरगलाया जाता हैं लोकतांत्रिक मूल्यों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जाती हैं, सेना ही सर्वेसर्वा हैं।

खैर, हम अपनी बात करते हैं आजादी के बाद हमारे बारे में पश्चिमी देशों द्वारा कहा गया की ये तो सांप सपेरों का देश है, हमारे यहां इतनी विविधता हैं कि हम कभी एक होकर रह ही नहीं सकते हम भी फेल हो जायेंगे। परंतु हमने उसी कमजोरी को अपनी ताकत में तब्दील किया और आज बड़े शान से हम कह सकते हैं की विविधता में एकता ही हमारी ताकत हैं, और यही हमे देश के लिए कुछ कर गुजरने का जरूरी संबल भी प्रदान करती हैं। इस वर्ष हम आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश करते हुए अपनी पूरी यात्रा को देखते हैं तो एक किस्म का सुकून तो मिलता ही हैं कि, हां हमे अभी एक लंबा रास्ता तय जरूर करना हैं पर हमारी नियत पवित्र है और रास्ता हमने सही चुना हैं। लोकतांत्रिक प्रणाली की थाती है हमारे पास, सबसे बड़े लोकतंत्र का तमगा है हमारे पास और अपने पुरखों द्वारा बनाई गई परंपराओं का पालन करने की सीख हैं हमारे पास। हमारे पुरखों ने जिस तरह आजादी के लिए संघर्ष किया और हमे एक आजाद मुल्क का नागरिक बनने का सौभाग्य प्राप्त करवाया, कम से कम हम उस लोकतांत्रिक व्यवस्था को तो सींच कर विशाल वृक्ष के रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया । बेशक हमारे देश में एक बार यह प्रयास किया गया की लोकतांत्रिक व्यवस्था को भंग कर दिया जाए परंतु जनता के आंदोलन के कारण उस समय के हुक्मरान अपने मनसूबों में कामयाब नहीं हो पाए, मौजूदा दौर में भी काफी परेशानियां हैं गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई,पिछड़ापन,आर्थिक असमानता लेकिन इन सारी परेशानियों से तो हमारी पिछली सरकारों और मौजूदा सरकार भी बखूबी से लड़ाई लड़ रही हैं और हमे उम्मीद है कि हम इस देश के नागरिक सरकार के साथ मिलकर अपनी सारी मुश्किलों से सफलता पूर्वक बाहर निकलेंगे और अपने देश को परम वैभव के शिखर पर आसीन करेंगे।

फिर भी हमने आजादी से लेकर अब तक, कुछ क्षेत्रों में ऐसी उबलब्धियां हासिल कर ली जिसमे दुनिया भी हमारा लोहा मानती हैं और हमने बड़ी-बड़ी शक्तियों को अपने सामने नतमस्तक करवाया हैं हमने सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में अपना सिक्का जमाया है, हमने कृषि के क्षेत्र में अपनी पैठ बना ली हैं, हमनें दुनिया में एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग कंट्री के रूप में अपनी पहचान बनाई हैं और तो और जिस देश ने हम पर 200 वर्षों तक शासन किया आज वो भी भारत के इतने बड़े बाजार को देखकर कई वर्षो से भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने के लिए लालायित हैं। ब्रिटेन वर्ष 2017 से लगातार यह कोशिश कर रहा हैं की किसी तरह से भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो जाए लेकिन भारत ने अपने बाजार की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अभी तक इस समझौते पर हामी नहीं भरी हैं। तो यह है भारत की ताकत, जिस बरतानिया हुकूमत के लिए यह कहा जाता था की इनका सूर्य कभी अस्त नहीं होता वह आज खुद इस हालत में पहुंच गया है कि अपने अधीन रहे देश के सामने एक अदद समझौते के लिए गुहार लगा रहा हैं । आज विश्व में भारत को एक अलग नजर से देखा जाता है, दुनिया भारत की बात को सुनती है इसे गंभीरता के साथ लिया जाता हैं, यह हमारे लिए किसी गौरव भरे क्षण से कम नहीं। भारत की जरूरत पश्चिमी देशों को और सुपरपावर अमेरिका को भी हैं इसीलिए भारत G-7 समिट का हिस्सा ना होने के बावजूद भारत को पिछले कई वर्षो से आमंत्रित किया जा रहा है, यह भारत की बढ़ती साख का एक बेतरतीब नमूना हैं। रूस यूक्रेन युद्ध में भी दुनिया बड़े ही ध्यान से देख रही थी कि भारत का इस पर क्या रुख हैं, भारत ने अपने हितों को ध्यान में रखते हुए बगैर किसी दबाव में आए बिना अपने तरीके से बखूबी इस मामले पर अपनी राय रखी।

हमने पूरा रास्ता तय कर लिया हो ऐसा नहीं है अभी मंजिल दूर है जिसके लिए मिलो दूर चलना है और वक्त भी काफी लगना हैं इसमें कई बहुत ही गंभीर प्रश्न मुंह बाए खड़े है हमे निगलने के लिए, लेकिन देश की आंतरिक समस्याएं हमारी है हम इसे देर सबेर सुलझा लेंगे क्योंकि, जब भारत की बात आती हैं तो हम सब एक हैं इसमें किसी भी बाहरी को किसी भी प्रकार दखलंदाजी करने का कोई भी अधिकार नहीं है और अगर किसी ने भी इस तरह की गुस्ताखी करने की कोशिश की तो उसे करारा जवाब मिलेगा।

अंत में भारत की इस विशाल जनता को कुछ बात बताना चाहूंगा कि देश को बनाने में सिर्फ सरकार ही नहीं जनता को भी अहम भूमिका निभानी चाहिए , क्योंकि देश को जनता बनाती है इसीलिए जनता का दतित्यव भी सरकारों से ज्यादा बनता है। सभी से यह अपील है की कुछ भीं क्रांतिकारी करने के बजाय छोटी छोटी चीजों पर ध्यान देने की जरूरत है जैसे की
1. अपने आसपास साफ- सफाई रखे।
2. स्वदेशी सामानों का अधिक से अधिक उपयोग करे।
3. खूब पढ़े ताकि सही ज्ञान हासिल हो सके, और अपने देश के इतिहास के बारे में जाने, क्योंकि कहा जाता हैं कि जिस देश ने अपने इतिहास को नहीं पढ़ा वो उससे सीख क्या लेगा और सीख लेकर अपना भविष्य केसे बनाएगा।

भारत माता की जय, वंदे मातरम्।