अनोखी Google लाइब्रेरी

0
54

1998 में विकसित गूगल से तो हम सब ही वाकिफ हैं, जो एक ऑनलाइन सूचना स्रोत है, लेकिन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सन् 1992 में स्तापित हुई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय की इस अनोखी Google लाइब्रेरी बारे में शायद ही आप जानते होंग। क्लिपिंग सेक्शन के नाम से परिचित यूनिवर्सिटी के पुस्तकलय में 1992 से तकरीबन 300 से अधिक विषयों पर न्यूज क्लिप्पिंग्स का संचय किया जा रहा है। न्यूज़ क्लिप्पिंग्स करते समय अखबारों में छपे एडिटोरियल नोट को सबसे जादा महत्व दिया जाता है। यहाँ छात्रों को हर प्रकार के विषयों की क्लिप्पिंग प्रताप हो सकती है फिर चाहे बात हाल ही में  काफी चर्चित रहे #metoomovement की हो या 1996 में राज्यसरकार का  के अविश्वास प्रस्ताव की हो।

28 साल से चल रही ये प्रकरिया यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए काफी मददगार साबित होती आई हैं। शोध करने वाले छात्रों के लिए ये न्यूज क्लिप्पिंग्स बहुत लाभदायक हैं, जिस के कारण वे पहले छपी हुई खबरों का ब्यौरा कर सकते हैं और संदर्भ साहित्य के तौर पर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। यूनिवर्सिटी द्वारा रोजाना तकरीबन 35 अख़बार पुस्तकालय में मंगवाए जाते हैं, जिसमें से 16 अखबारों की दो-दो प्रतियां मंगवाई जाती हैं ताकि उससे न्यूज़ क्लिप्पिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सके। आज के इस डिजिटल युग में जहाँ लोग दिन भर इंटरनेट के सहारे जी रहे हैं वहाँ ऐसी अनोखी लाइब्ररी का होना अपने आप में सराहनीय बात है। इस बारे में जब हमने  पुस्तकालय की अध्यक्ष डॉ. आरती सारंग से बात की तो उनका कहना था कि डिजिटल न्यूज़ की एक सीमा है, कई बार हम देखते हैं कि फेक न्यूज़ ऑनलाइन साइट्स पर छापी जाती है, जिसके कारण काफ़ी परेशानी होती है, जबकि न्यूज़ क्लिप्पिंग्स विश्वसनीय होती हैं और ये छात्रों के काम आती हैं।जब भी किसी छात्र को इससे लाभ होता है तो हमें बहुत गर्व होता है।

इसके अलावा लाइब्रेरी में एक स्थान ऐसा भी है जोकी सिर्फ और सिर्फ अखबारों को समर्पित किया गया हैं। वर्त्तमान वर्ष और पिछले वर्ष के सारे अखबारों का यहाँ संचयन किया गया है | हर वर्ष इस प्रक्रिया को अमल में लाया जाता है, और पुराने अखबारों का इस्तेमाल छात्रों द्वारा यूनिवर्सिटी में हो रहे कार्यक्रमों में पोस्टर्स इत्यादी बनाने में  किया जाता है| पत्रकारिता का अध्यन करने वाले छात्रों के लिए अखबारों संचाये होना कितना महत्व हैं इसका जीवित उदहारण एमसीयू अपने पुस्तकालय  द्वारा देता आया हैं।

Bhavisha Makhijani

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here